भगवान् श्रीराकृष्ण की जन्मलीला अलौकिक है। वे ही लोक के कारण और कार्य भी हैं।वस्तुतः वे ही लोक के कर्ता कारयिता हैं और करणसामग्री भी हैं।
अस्थिरसंसार सरक रहा है।दरक रहा है। एकमात्र वे ही स्थिर हैं।जगत् के गमन की अनुभूति इन्ही के साक्षिभाव से है।ये साक्षीरूप अनुभव में न आवैं,रमारमण में रमण नहीं हो तो भ्रमण भावी भव भुवन में कर्मबद्ध पुनर्भव कराता रहेगा।
समाधि सिद्ध सिद्धवाणियां प्रसिद्ध हैं।
रामो विग्रवान् धर्मः
दशरथ को भगवान् ने अपने पिता रूप में स्वयं वरण करके विप्रधेनुसुरसन्त हित लीन्ह मनुज अवतार।
असामान्य जन्म है, अजन्मा का। सामान्य रूप से माता के गुण,पुत्र में होते हैं, यह लोकवेद सिद्ध सिद्धांत है।
लेकिन यशोदाकौशल्यादि माताओं में श्रीकृष्णरामादि के लीला गुणगण यथा-माखन चोरी से खाना,मिट्टी खाना,
सौशील्य, आदि प्रकट होते हैं। यही भगवान् के जन्म की अलौकिकता और अप्राकृतता है।
हरिः शरणम्।
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