तब जीवन पथ पर क्या बाधा।
जब शरण हमारे रघुपति हैं।
तब नहीं हमारी दुर्गति है।
हम जीव अंश तुम अंशी हो।
आधार अधर धर वंशी हो।
राधामाधव नित महारास।
देखें प्रतिक्षण है यही आस।
हम सेवक सेव्य आप जानो।
यह दास सदा अपना मानो।
जीवन की बाजी लगा दिया।
दम निकले रटते पियासिया।
यह जग जीवन सब तेरा है।
हे प्रभु कहिये क्या मेरा है।
तब सब तेरा तुझको अर्पण।
मैं तेरा हूँ तूँ मम दर्पण।
यह भाव स्वभाव तुम्हारा है।
यह जग माया से हारा है।
स्मृति प्रभु अब दो अपनी अविरल।
जग विस्मृत होये विरल विरल।
हरिगुरुसन्तः शरणम्
http://shishirchandrablog.in