भरोसो जाहि दूसरो सो करो

भाई जी, हमारी बड़ी समस्या है।

हम हम करि धन धाम संवारे बचे न काल बली ते।
मन पछितैहैं अवसर बीते-

पूज्य गोस्वामी तुलसीदास जी विनय पत्रिका में।
दास ने सभी पूज्य जनों से सुना है और भगवत्कृपा से पढ़ा भी है कि यह अहं जाता नहीं और बारम्बार भवबन्ध में जकड़े रहता है।
किसी अहंशून्य महत्पुरुष की कृपा बस हो जाय तो काम बन जाय।
मन बुद्धि चित्त और अहं में क्रमशः एक से आगे एक सूक्ष्मतर है।
इसी अहं से मम जुड़ा है।
देह भाव वही मेट सकें जिन सन्तन कौ मिट गयो है।
सबके देह परम प्रिय स्वामी।
अब जब परम प्रिय राम जी हो जायें, हनुमानजी जी कृपा करैं।
सन्त भक्त जन दया का पात्र बना लें।

राम नाम के पटतरे देबे को कछु नाहिं।
क्या लै गुरु सन्तोसिये हौंस रहि मन माहिं।।
मो को तो राम को नाम कलपतरु कलि कल्यान फरो।
भरोसो जाहि दूसरो सो करो।


हरिगुरुसन्तः शरणम्
https://shishirchandrablog.in

Unknown's avatar

Author: Prof. Shishir Chandra Upadhyay

I am Professor of Sanskrit subject in K.B.P.G College, Mirzapur, Uttar Pradesh, India, since 1991.

Leave a comment