जानकीनाथ सहाय करैं तब राम से राम चहै नर नेरो।
नामहि राम रटै नर प्रतिछन देखि परैं हरि इत उत मेरो।
बनै दसा येहि गुरु किरपा कृत दास बुद्धि मन निश्चय मेरो।मानुष जनम सफलता एहि मैं राम नाम रसना रट तेरो।
यह इतिहास पुरान विदित मुनि वेदव्यास कहि गये चितेरो। वचन अन्यथा होत कबहुँ नहिं यदि विश्वास राम पर तेरो। जरत करम गत पूर्व कुण्डली राम राम है एक निबेरो।
हरिः शरणम्।
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