राम नाम के सहारे

बात समझ में तब आयेगी महात्माओं की जब निरन्तर नाम चलेगा।नहीं तो काम ने छला है, और छलता रहेगा।
यह आवागमन चलता रहेगा।
संसार विवर्त विकार है, उस पुरुष विशेष का।यह विकार ही कामना काम है। काम रहेगा संसार रहेगा। राम रहेगा संसार हटेगा।
बात वैज्ञानिक है।मान लीजिए, अपना क्या है?आत्मा आत्मरूप छोड़कर।
आत्मदेव के रहते सारी पूजा खानपान सम्मान,नहीं तो कोई हो शङ्कराचार्य ही क्यों नहीं,हो कब तक शरीर रखा जा सकता है।इसलिए आत्मवत् सर्वभूतेषु, जानकारी में आ जाये,तब सब मिल गया,वासुदेवः सर्वम् भी सध जायेगा।नहीं तो एक चांस और व्यर्थ गया।
अव्यर्थ साधन है, रामनाम।नहीं तो राम के शरीर से हटने के बाद,उस राम की   सत्यता का सत्यापन? कैसा समाज है?
जब पिण्ड से बाहर हुए जीवराम,ब्रह्माण्ड में पहुंचे,कर्मवश,तब सूक्ष्मशरीरराम को रामनाम सत्य बताया जाना ही द्योतक है, इस बात का कि राम तो त्रिकालाबाधित सत्य हैं।स्थूल में सुना है, तो सूक्ष्म में भी वही सत्य हैं, एकमात्र।
राम सत्य संकल्प प्रभु हैं।उन्ही से ही  जैसा भी हो सारी साज सज्जा है,नहीं तो सज्जनों! साज गया, आवाज गई, नामी गया,नाम गया।कौन नाम लेने वाला है।सब भूल जाते हैं, एक ही दिन में,जब तक सूरज चाँद रहेगा, अमुक जी का नाम रहेगा, बस एक दिनी वन डे है।मीरारैदास  कबीर,सूर तुलसी नाम का सिक्का चल रहा है।चलते रहेंगे सब रामनाम के सहारे।और सहारे सब हारे।समझ आयेगी इसी राम नाम के सहारे।नहीं तो सन्त तो कहते रहेंगे।सन्तों की अच्छी बाते हैं अच्छा लगना स्वाभाविक ही है।लेकिन समझ   (ज्ञान)तो राम नाम के सहारे।


हरिगुरुसन्तः शरणम्।
http://shishirchandrablog.in

Unknown's avatar

Author: Prof. Shishir Chandra Upadhyay

I am Professor of Sanskrit subject in K.B.P.G College, Mirzapur, Uttar Pradesh, India, since 1991.

Leave a comment