मंगल कौ तुम मंगल साजत हृदयराखि सियरामबिहारी।
वेगि हरो हनुमान महाप्रभु जौ कछु संकट होइ हमारी।
संकट एक दिखात हमै एहि आपनि माया भगाव बिहारी।
अब और नहीं सहि जात प्रभो निज दिव्य स्वरूप दिखाव बिहारी।
तव दिव्य स्वरूप को देखि छनै यह भागि चलै निज रूप उघारी।तब जानि परै यह पिण्ड शरीर है पूरन काम भयौ भर भारी।
एहि मानव देह कौ लक्ष्य इहै निज रूप गयौ हमसों जो बिसारी।बेगि दिखाव हमैं निज रूप हे राम कौ दूत हो अद्भुत कारी।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु जौ कछु संकट होइ हमारी।
मंगल कौ तुम मंगल साजत हृदयराखि सियराम बिहारी।
हरिगुरुसन्तः शरणम्
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