मत कहो कुहरा घना है,मत कहो कुहरा घना है। यह किसी की भी नहीं आलोचना है। यह किसी की भी नहीं आलोचना है।
प्रकृति का संघात सुन्दर, हो नहीं सकता असुन्दर। पांचभौतिक द्वन्द्व जगती,जहां माया नृत्य करती।शिशिर शीतल हिम हिमाकर।प्रखर कुहरा कहे आकर।कुहर कुहरा बन शिवाशिव।कह रहा द्रुत वेग आ शिव।सिन्धुसरिता घोष करती।नवसृजन उल्लास भरती।राष्ट्र का मन्दिर सुहाना।राष्ट्र हिन्दू चिर पुराना।राम मेरे आ गए हैं।दिव्यमन्दिर में भए हैं।प्रभुभाव की बहती नदी है।म्लेच्छ जग की त्रासदी है।होकर अमायिक जगत देखो।कृपा भगवत् भक्त लेखो।कृपा क्या होती निहारो।नरतन मिला उसको न जारो।मिलेगा सबको मिला है, इसी तन से।जप सदा श्रीरामसीता मनन मन से।फलित हो फलितार्थ जीवन जीव तब।गिर पड़ो पदरज गहो प्रभुभक्त के जब।
राम सबमें श्याम सबमें जिस किसी को दीखते हैं।प्रभुप्रेमव्याकुल इन चरित्रों से सभी हम सीखते हैं।
रावण डरेगा कंस डरता।क्या कभी प्रभुभक्त डरता। राम शाश्वत कृष्ण शाश्वत। हैं सभी अभिराम शाश्वत।राम राजा राज्य जीवन। बन गये जब थे गये बन।बने सबके राम प्रिय थे। कभी क्या किसके अप्रिय थे।राम धर नरतन अप्राकृत।संहिता व्यवहार की कृत।किया सबको शिरोधारण। गीध शबरी हृदय वारण।राम की जब जब कथा हो। दूर जाती तब व्यथा हो।हैं राम नीती राम प्रीती।धर हृदय सब जंग जीती।मोद का मोदक लिया है।राम रटता जो सिया है।क्या कहूँ यह सिद्ध गाथा।राम-पद में झुका माथा। आज हर्षित कृष्ण केशव।आज हर्षित राम माधव।राष्ट्र की नव चेतना है।राम ही कुहरा घना है। राम अभिनव कल्पना हैं।राम नव नव अल्पना हैं।इसलिये आवाज आती।हर दिशाएँ साज गाती।मत हो कुहरा घना है।मत कहो कुहरा घना है।यह किसी की भी नहीं आलोचना है।राम भारत राम वैभव।राम रटते कटेगा भव।
कुहरा रहे श्रीराम का।मृत्यु अन्तिम तब बने अभिराम का।इसीलिये-
मत कहो कुहरा घना है।
मत कहो कुहरा घना है।
हरिगुरुसन्तः शरणम्।
http://shishirchandrablog.in