श्रीसीताराम

यदि भारत में रहना है।
मर्याद सनातन गहना है।
नष्ट हुआ गजवाये हिन्द।
उदित सनातनधर्म अनिन्द।
रामराष्ट्र के हैं सन्यास।
राम भारती माँ विन्यास।
भारत की अस्मिता खड़ी।
हिन्दुराष्ट्र की नींव पड़ी।
आसेतुहिमाचल रामराज्य।
राम सत्य अविचलअविभाज्य
राम गान्धी स्वप्निल भारत।
केशव माधव मन महिमारत।
राम राष्ट्रिय स्वयं संघ हैं।
राम सभी में स्पन्द संघ हैं।
राम सनातन प्रेम प्रवाह।
राम हृदय के मोद उछाह।
राम हमारे हैं चिर नूतन।
राम जनों के पूर्व पुरातन।
राम राष्ट्र अभिनन्दन मूर्ति।
राम बुद्धि चिन्तन की स्फूर्ति।
राम प्राण बह रोम रोम।
राम पवन धरणी में व्योम।
राम अपावन पावन करते।
राम पवित्रित पावन करते।
राम मनुज आचार संहिता।
राम विचारित नदी बृंहिता।
राम सतत श्वास प्रश्वास।
राम दीप दीपित आकाश।
राम नवल नव नव्य निनाद।
राम तमःपशु सिंहनिनाद।
राम कहो आराम मिलेगा।
राम रटो भवरोग कटेगा।
राम राम कह राजा राम।
राम राम श्रीसीताराम।

हरिगुरुसन्तः शरणम्।
http://shishirchandrablog.in

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Author: Prof. Shishir Chandra Upadhyay

I am Professor of Sanskrit subject in K.B.P.G College, Mirzapur, Uttar Pradesh, India, since 1991.

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