मेरी माँ! माया मत दे, माया का साया हटा।
शरणागतदुःखजगत क्षण में है कटा कटा। माया ने जगत् में बहुत है भटकाया। दूसरे शरीरों की राहों को दिखाया।
खोया सब अनेक बार, कुछ भी नहीं पाया। यही संसार की त्रिगुणा है माया। छूटते न मोहपाश,विघ्नअन्तराया। कृपा करो विद्या माया(विन्ध्यवासिनी)
बरसे मेघ- दया दाया।
जपतप व्रतअनुष्ठान, तीर्थाटन साधन महान। सबका फल दे दोअम्ब!तुम ही हो स्वावलम्ब।विस्मृत सुखदुखाभास। मेरा न अपना प्रयास। जानता न पूजापाठ।खोलो भवबन्ध गाँठ। दे दो अविस्मृत स्वरूप।
धाम लीला नाम रूप। अविच्छिन्न अविचल स्मृति माँ मैं तेरा।तूँ भी कह मेरा है,मिट जाये फेरा। अपनाओ मैं कुपूत, तुम नहीं कुमाता। मेरी हो गुरू, तात पिता और माता। भागी है, भागेगी दासी अविद्या माया। करुणामयि कृपामूर्ति अब तो करो दाया।रामकृष्ण दुर्गा रटे,नष्ट पाप पुण्य राशि।जीवन के त्रिविध रंग,अन्तर प्रत्यन्तर भाषि। भासती अनुभव कराती आतम प्रकाश राशि।मायातीत रंग चढ़ै संसृति की चक्रनाशि!
गुरुहरी शरणम्