मन रम रामचरन सुखदाई।भज मन भक्तचरन सुखलाई।
नारायण सुन्दर प्रभु-प्रभुता
भजत मैल मन जाई।
जिन्ह सन्तन कै मिटी मलिनता, तेहिं चरनन परि जाई।मन रम रामचरन सुखदाई। भज मन भक्तचरन सुखलाई। भक्त हनूमत हृदय बसत तुम राम राम कहि जाई। जाकर रिनिया मेरे प्रभु भे, भगत राज कहि जाई।रम मन राम चरन सुखदाई। भज मन भक्तचरन सुखलाई।
राम-राम रटि मीरा कौ मिलि कृष्णचरन सुख भाई।जिन चरनन अस्मरन करत ही, द्रौपदि लाज बचाई।मन रम रामचरन सुखदाई।भज मन भक्तचरन सुखलाई।
अम्बरीष राजा जेहि चरनन परत भगति सुख पाई। प्रभु भव भंजन सेवक रंजन हेतु जनम जेहि भाई।ऐसो प्रभु भगतन कै चरनन्हि पर गिर काम बिहाई।
रम मन रामचरन सुखदाई।
भज मन भक्तचरन सुखलाई।।
गुरः शरणम्। हरिः शरणम्।