साधना का पथ कठिन लेकिन सरल से भी सरल है।
सृष्टि का प्रत्येक कोना आत्म अंशी का महल है।
हो गई “गुरु” की कृपा यदि जीव जीवन ही सफल है।
जब हुए निष्काम हम माया मरी सुन लो अटल है।
साधना का पथ कठिन लेकिन सरल से
भी सरल है।
थी चली यात्रा जहाँ से बढ़ रहे प्रतिपल विपल है।
कठिन पनघट की डगर फिर हम गहें संकल्प बल है।
काल कहता “ध्रुव” कहानी कल हुआ था आज कल है।
राम का अभिराम का सब नाम का ही आत्मबल है।
साधना का पथ कठिन लेकिन सरल से भी सरल है।
गुरुः शरणम्।हरिः शरणम्।
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