देखो बड़ी बातें कह देना लिख देना और कुछ है ।
किन्तु रामकृष्णनारायण नामों का सतत मनवचनकर्म में अनुभव करना दूसरी बात।
रामकृष्णनारायण नामों का चौबीसों घंटे जब सतत स्मरण करोगे तब आदमी बनोगे। मैं तो आदमी बनने की तलाश इन्हीं नामों में कर रहा हूँ। आज से अभी से इनके लीला कथा चरित अमृत में डूब जाना पड़ेगा।
तब आत्मस्मृति होगी।
आत्मस्मृति होते ही जगद् में जगत् के कण-कण में आमने सामने इधर उधर छोटे बड़े सभी में तत् तत्व आत्मतत्व का इन्हीं चर्मचक्षुओं से दर्शन होने लगेगा। सब काम बन जायेगा।
और नहीं तो रोज चौबीसों घंटे सतत नाम स्मरण नहीं होगा।कुछ उखड़ने वाला नहीं। यह त्रिगुणात्मक माया सब उखाड़ देगी।
राम राम राम जीह जौ लौं तू न जपिहै।
तौ लौं तू कहूँ जाय त्रिविध ताप तपिहै।
गुरुः शरणम् ।हरिः शरणम्।