भगवद् स्मरण में चित्त लगाना। जैसे भी हो भगवद् गुण गाना।
राजा राम अवध रजधानी।
जब प्रभु अपने सभी परिकर सहित हमारे शरीर राज्य को राजधानी बना लिये। तब उनके साथ जगदम्बा जानकी सभी राजकुमार और श्रीहनूमान् जी भी अपने अनुचरों सहित विराजते ही हैं।
भगवान् की राजा राम की राजधानी बना यह शरीर विकार रहित होकर अवध ही
बनेगा।
“अवध” का मतलब पुनः काल बाधित होकर जन्म ही नहीं लेगा ।
और सार्थक हो जायेगा।
यह मानव तन।
।। हरिः शरणम् ।।