सुमिरि पवनसुत पावन नामू।
अपने बस करि राखे रामू।।
भगवान् के रामकृष्ण नारायण नामों का स्मरण जीव को सब कुछ सुलभ करा देता है और सर्व सिद्धि ही ,बल्कि आराध्य परमात्मा भी ,भक्त के वश में हो जाते हैं।और मानवजीवन का सर्वोच्च प्राप्य भी भगवत् प्राप्ति ही है। प्रभु का मान भले टल जाये, भक्त का मान न टलते देखा। लेकिन सारी संसारी कामना त्याग कर ,केवल और केवल भगवत् प्राप्ति ही जीव का लक्ष्य बन जाय। तो जाहिर है ,सब मम प्रिय, सब मम उपजाए, जैसे भगवान् भक्त के वशवर्ती हो जायँ।
महावीर हनुमानजी महाराज सतत भगवन्नाम का स्मरण करते रहते हैं।
वेद कहते हैं- तस्मिन ज्ञाते सर्वं विज्ञातं भवति। मतलब कि भगवद् दर्शन हो जाने पर ,जीव मुक्त होकर ,जन्म मरण के चक्र से निकल कर, समस्त ब्रह्माण्ड में अविगत भगवान् के साथ गतगति हो जाता है।
अतः सतत नाम स्मरण करके ,सनातन धर्म की सनातन सरणि पर चलें, और
सब कुछ प्राप्त कर लें।
जयति काल गुण कर्ममाया मथन, निश्चल ज्ञान,व्रतसत्य रत,धर्म चारी।
सिद्ध सुर वृंद योगीन्द्र सेवित सदा,दास तुलसी प्रणत भय तमारी।
भक्तिविनम्रमूर्ति हनुमानजी महाराज कृपा करें।
।। हरिः शरणम् ।।