का वार्ता किमाश्चर्यं कः पन्थाः कश्च मोदते।
इति मे चतुरः प्रश्नान् पूरयित्वा जलं पिब ।।
सबसे बड़ी बात क्या है?
सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?
संसार में चलने का मार्ग क्या है?
संसार में कौन आनन्दित होता है?
1-मासर्तु वर्षाःपरिवर्तनेन
सूर्याग्निना रात्रिदिवेन्धनेन।
अस्मिन् महामोहमये कटाहे
भूतानि कालः पचतीति वार्ता।।
इस संसार रूपी महा मोहमय कड़ाही में मास,वर्ष आदि ऋतुओं के परिवर्तन से, सूर्यरूप अग्नि के ईंधन से रात्रिऔर दिन का काल प्राणियों को पकाता है।इस बात का अहसास मनुष्य को नहीं होता, यही सबसे बड़ी बात है।
2-अहन्यहनि भूतानि गच्छन्ति यममन्दिरम्
शेषाः जीवितुमिच्छन्ति किमाश्चर्यमतःपरम् ।।
प्रतिदिन प्राणी संसार को त्याग कर यमलोक सिधार रहे हैं।इसे देखने के बाद भी अन्य लोग जीने की इच्छा पाल कर सोचते हैं, हम ऐसे ही रहेंगे।इससे बड़ा आश्चर्य क्या है?
3-श्रुतयो विभिन्ना स्मृतयो विभिन्नाः
नैको मुनिर्यस्य वचः प्रमाणम् ।
धर्मस्य तत्वं नहितं गुहायां
महाजनो येन गतः स पन्थाः।।
श्रुतियाँ अनेक ,स्मृतियाँ भी अनेक हैं।कोई
एक भी ऐसे ऋषि नहीं हैं, जिनका ही केवल एक वचन प्रमाण रूप माना जा सके।और धर्म का तत्व भी बड़ा गूढ़ है।अतः श्रेष्ठ जन जिस मार्ग पर चले हैं, वही मार्ग ग्रहण करना चाहिए।
4-दिवसस्याष्टमे भागे शाकं पचति स्वे गृहे।
अनृणी चाप्रवासी च स वारिचर मोदते।।
हे जलचर प्राणी! दिन के आठवें भाग यानी कि सुबह शाम जो अपने घर में शाक आदि पूर्ण अन्न भोजन करता है।साथ ही जिस पर कोई ऋण न हो और जिसे जीविका वश अन्यत्र प्रवास नहीं करना पड़ता, वही इस संसार का सबसे सुखी प्राणी है।
।।हरिश्शरणम्।।
https://shishirchandrablog.wordpress.com/2018/05/27/यक्ष-युधिष्ठिर-संवाद/