मन रुपी दर्पण

जो अज्ञानी, मूर्ख, अन्धे और भाग्यहीन है तथा जिनके मन रुपी दर्पण पर विषय की काई जमी हुई है, जो लंपट ,कपटी और कुटिल स्वभाव वाले है, जिन्होंने सन्त समाज के दर्शन नहीं किए है ,उन्हें भगवान श्री राम का रूप भी नहीं दिखाई देगा।ऐसे लोग उन्माद ग्रस्त होकर, भूतों की तरह बिना विचारे बोलते है ।इस प्रकार के लोगों ने महामोह रूपी मदिरा पी रखी है ,जिनके कहने पर भारत की धर्म प्राण जनता अब ध्यान नहीं देती।ऐसे अप्रासंगिक और विषयासंगिक लोगों को आगे भी जनता जबाब देगी-“अग्य अकोबिद अन्ध अभागी ,काई विषय मुकुर मन लागी ।लंपट कपटी कुटिल विशेषी ।सपनेहु सन्त सभा नहिं देखी।बातुल भूत विवश मतवारे ,ते नहिं बोलहिं बचन बिचारे।जिन्ह कृत महामोह मद पाना।तिन्ह कर कहा करिअ नहिं काना ।”

||हरि:शरणम्||

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Author: Prof. Shishir Chandra Upadhyay

I am Professor of Sanskrit subject in K.B.P.G College, Mirzapur, Uttar Pradesh, India, since 1991.

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