अहिंसा से बढ़कर कोई पुण्य नहीं

परम धर्म श्रुति विदित अहिंसा।
परनिंदा सम अघ न गरीसा।।
अर्थात्-अहिंसा से बढ़कर कोई पुण्य नहीं।परनिंदा से बढ़कर कोई पाप नहीं।
परनिंदा से सप्रयास बचना चाहिए, क्योंकि उसके कुफल बड़े कष्ट प्रद हैं-
हर गुरु निन्दक दादुर होई।
जन्म सहस्र पाव तन सोई।।
द्विजनिन्दक बहुनरक भोगकरि।
जग जनमै बायस शरीर धरि।।
सुरश्रुति निन्दक जे अभिमानी।
रौरव नरक परहिं ते प्रानी।।
होहिं उलूक सन्त निन्दा रत।
मोह निशाप्रिय ज्ञान भानुगत।।
सब कै निन्दा जे जड़ करहीं।
ते चमगादुर होइ अवतरहीं।।
हरिश्शरणम्।

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Author: Prof. Shishir Chandra Upadhyay

I am Professor of Sanskrit subject in K.B.P.G College, Mirzapur, Uttar Pradesh, India, since 1991.

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